अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सैल हिमाचल आदिक जेते। चित्रकूट जसु गावहिं तेते।।
मूल पाठ
सैल हिमाचल आदिक जेते। चित्रकूट जसु गावहिं तेते।।
बिंधि मुदित मन सुखु न समाई। श्रम बिनु बिपुल बड़ाई पाई।।
स्रोत अभिलेख 2.138 · पुस्तक पृ. 458, 459
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर हिमालय आदि जितने पर्वत हैं, सभी चित्रकूटका यश गाते हैं। विन्ध्याचल बड़ा आनन्दित है, उसके मनमें सुख समाता नहीं; क्योंकि उसने बिना परिश्रम ही बहुत बड़ी बड़ाई पा ली है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 458 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सैल हिमाचल आदिक जेते। चित्रकूट जसु गावहिं तेते।।
English explanation
All the mountains, including the Himalaya, sing Chitrakoot’s glory.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सैल | पर्वत | mountains |
| हिमाचल | हिमालय | the Himalaya |
| आदिक | आदि | and others |
| जेते | जितने भी | however many there are |
| चित्रकूट | चित्रकूट का | of Chitrakoot |
| जसु | यश | glory |
| गावहिं | गाते हैं | sing |
| तेते | वे सभी | all of them |
2 बिंधि मुदित मन सुखु न समाई। श्रम बिनु बिपुल बड़ाई पाई।।
English explanation
Vindhya is delighted; its heart cannot contain its happiness, for it has gained great renown without effort.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिंधि | विंध्य पर्वत | the Vindhya mountain range |
| मुदित | आनंदित | delighted |
| मन | मन में | in its heart |
| सुखु | सुख | happiness |
| न | नहीं | not |
| समाई | समाता है | can be contained |
| श्रम | परिश्रम | effort |
| बिनु | बिना | without |
| बिपुल | बहुत बड़ी | great |
| बड़ाई | प्रतिष्ठा | renown |
| पाई | प्राप्त की है | has gained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.138
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 458
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 458, 459
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।