अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सेवहिं सकल सवति मोहि नीकें। गरबित भरत मातु बल पी कें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[कौसल्या समझती है कि] और सब सौतें तो मेरी अच्छी तरह सेवा करती हैं, एक भरतकी माँ पतिके बलपर गॢवत रहती है! इसीसे हे माई! कौसल्याको तुम बहुत ही साल (खटक) रही हो। किन्तु वह कपट करनेमें चतुर है; अत: उसके हृदयका भाव जाननेमें नहीं आता (वह उसे चतुरतासे छिपाये रखती है)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 358 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सेवहिं सकल सवति मोहि नीकें। गरबित भरत मातु बल पी कें।।
सालु तुम्हार कौसिलहि माई। कपट चतुर नहिं होइ जनाई।।
स्रोत अभिलेख 2.18 · पुस्तक पृ. 358, 359
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सेवहिं सकल सवति मोहि नीकें। गरबित भरत मातु बल पी कें।।
English explanation
Manthara attributes this attitude to Kaushalya: All my co-wives serve me well, but Bharata’s mother is proud of her husband’s support.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेवहिं | सेवा करती हैं | serve |
| सकल | सभी | all |
| सवति | सौतें; सहपत्नियाँ | co-wives |
| मोहि | मेरी; मुझे | me |
| नीकें | अच्छी तरह | well |
| गरबित | गर्व से भरी | proud |
| भरत | भरत की | of Bharata |
| मातु | माता, कैकेयी | mother, Kaikeyi |
| बल | सहारे; प्रभाव के बल पर | on the strength of support |
| पी | पति | her husband |
| कें | के | of |
2 सालु तुम्हार कौसिलहि माई। कपट चतुर नहिं होइ जनाई।।
English explanation
Mother, Kaushalya resents you; she is skilled in deceit and does not let it show.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सालु | खटकना; चुभन | a source of resentment; a thorn |
| तुम्हार | आपसे होने वाला | caused by you |
| कौसिलहि | कौसल्या को | to Kaushalya |
| माई | हे माता | O mother |
| कपट | छल में | in deceit |
| चतुर | चतुर | skilled |
| नहिं | नहीं | not |
| होइ | होने पाती | comes to be |
| जनाई | प्रकट; ज्ञात | revealed; known |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 358
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 358, 359
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।