अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चतुर गँभीर राम महतारी। बीचु पाइ निज बात सँवारी।।
मूल पाठ
चतुर गँभीर राम महतारी। बीचु पाइ निज बात सँवारी।।
पठए भरतु भूप ननिअउरें। राम मातु मत जानव रउरें।।
स्रोत अभिलेख 2.18 · पुस्तक पृ. 358, 359
भावार्थ
मूल पाठ के बादरामकी माता (कौसल्या) बड़ी चतुर और गम्भीर है (उसकी थाह कोई नहीं पाता)। उसने मौका पाकर अपनी बात बना ली। राजाने जो भरतको ननिहाल भेज दिया, उसमें आप बस रामकी माताकी ही सलाह समझिये!॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 358 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चतुर गँभीर राम महतारी। बीचु पाइ निज बात सँवारी।।
English explanation
Manthara says: Rama’s mother is clever and reserved; finding an opportunity, she has advanced her own cause.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चतुर | चतुर | clever |
| गँभीर | गंभीर; मन की बात न खोलने वाली | reserved; not revealing her intentions |
| राम | राम की | of Rama |
| महतारी | माता, कौसल्या | mother, Kaushalya |
| बीचु | अवसर | an opportunity |
| पाइ | पाकर | having found |
| निज | अपनी | her own |
| बात | बात; अपना प्रयोजन | cause; purpose |
| सँवारी | सँवार ली; साध ली | advanced; secured |
2 पठए भरतु भूप ननिअउरें। राम मातु मत जानव रउरें।।
English explanation
The king sent Bharata to his maternal family’s home; understand that this was on Rama’s mother’s advice.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पठए | भेजा | sent |
| भरतु | भरत को | Bharata, as the one sent |
| भूप | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| ननिअउरें | ननिहाल में | to his maternal family’s home |
| राम | राम की | of Rama |
| मातु | माता की | his mother’s |
| मत | सलाह; सम्मति | advice; counsel |
| जानव | जानिए; समझिए | understand; recognize |
| रउरें | आप | you, respectfully |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 358
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 358, 359
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।