अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राजहि तुम्ह पर प्रेमु बिसेषी। सवति सुभाउ सकइ नहिं देखी।।
मूल पाठ
राजहि तुम्ह पर प्रेमु बिसेषी। सवति सुभाउ सकइ नहिं देखी।।
रची प्रंपचु भूपहि अपनाई। राम तिलक हित लगन धराई।।
स्रोत अभिलेख 2.18 · पुस्तक पृ. 358, 359
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजाका तुमपर विशेष प्रेम है। कौसल्या सौतके स्वभावसे उसे देख नहीं सकती। इसीलिये उसने जाल रचकर राजाको अपने वशमें करके [भरतकी अनुपस्थितिमें] रामके राजतिलकके लिये लग्र निश्चय करा लिया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 358 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राजहि तुम्ह पर प्रेमु बिसेषी। सवति सुभाउ सकइ नहिं देखी।।
English explanation
The king loves you especially; owing to a co-wife’s jealous disposition, Kaushalya cannot bear to see it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राजहि | राजा को; राजा का | the king has |
| तुम्ह | आप | you |
| पर | पर; के प्रति | toward |
| प्रेमु | प्रेम | love |
| बिसेषी | विशेष; अधिक | special; exceptional |
| सवति | सौत का | a co-wife’s |
| सुभाउ | स्वभाव | disposition |
| सकइ | सकती हैं | can |
| नहिं | नहीं | not |
| देखी | देखना; देखकर सहना | see; bear to see |
2 रची प्रंपचु भूपहि अपनाई। राम तिलक हित लगन धराई।।
English explanation
She devised a scheme, won the king over, and had an auspicious time fixed for Rama’s coronation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रची | रचकर | having devised |
| प्रंपचु | छल-योजना; प्रपंच | a deceptive scheme |
| भूपहि | राजा को | the king |
| अपनाई | अपने पक्ष में करके | having won over |
| राम | राम के | Rama’s |
| तिलक | राज्याभिषेक | coronation |
| हित | के लिए | for |
| लगन | शुभ मुहूर्त | auspicious time |
| धराई | निर्धारित करा दिया | had fixed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 358
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 358, 359
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