अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
यह कुल उचित राम कहुँ टीका। सबहि सोहाइ मोहि सुठि नीका।।
मूल पाठ
यह कुल उचित राम कहुँ टीका। सबहि सोहाइ मोहि सुठि नीका।।
आगिलि बात समुझि डरु मोही। देउ दैउ फिरि सो फलु ओही।।
स्रोत अभिलेख 2.18 · पुस्तक पृ. 358, 359
भावार्थ
मूल पाठ के बादरामको तिलक हो, यह रघुकुलके उचित ही है और यह बात सभीको सुहाती है; और मुझे तो बहुत ही अच्छी लगती है। परन्तु मुझे तो आगेकी बात विचारकर डर लगता है। दैव उलटकर इसका फल उसी (कौसल्या) को दे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 358 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 यह कुल उचित राम कहुँ टीका। सबहि सोहाइ मोहि सुठि नीका।।
English explanation
Rama’s coronation is proper according to this family’s tradition; it pleases everyone, and I too find it very good.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | इस | this |
| कुल | राजवंश में; कुल की रीति से | in the royal family’s tradition |
| उचित | उचित है | is fitting |
| राम | राम | Rama |
| कहुँ | को; के लिए | for |
| टीका | राज्याभिषेक का तिलक | the coronation mark; coronation |
| सबहि | सबको | to everyone |
| सोहाइ | अच्छा लगता है | is pleasing |
| मोहि | मुझे | to me |
| सुठि | बहुत | very |
| नीका | अच्छा | good |
2 आगिलि बात समुझि डरु मोही। देउ दैउ फिरि सो फलु ओही।।
English explanation
But thinking of what may follow, I am afraid; may fate turn that same consequence back upon Kaushalya herself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आगिलि | आगे की; भविष्य की | what lies ahead |
| बात | बात; स्थिति | matter; situation |
| समुझि | समझकर; सोचकर | considering |
| डरु | भय | fear |
| मोही | मुझे | to me |
| देउ | दे | may give |
| दैउ | दैव; भाग्य | fate; providence |
| फिरि | पलटकर | in return; turning back |
| सो | वही | that same |
| फलु | फल; परिणाम | result; consequence |
| ओही | उसी को, कौसल्या को | to her herself, Kaushalya |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 358
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 358, 359
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।