अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सेवक सदन स्वामि आगमनू। मंगल मूल अमंगल दमनू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयद्यपि सेवकके घर स्वामीका पधारना मङ्गलोंका मूल और अमङ्गलोंका नाश करनेवाला होता है, तथापि हे नाथ! उचित तो यही था कि प्रेमपूर्वक दासको ही कार्यके लिये बुला भेजते; ऐसी ही नीति है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 351 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सेवक सदन स्वामि आगमनू। मंगल मूल अमंगल दमनू।।
तदपि उचित जनु बोलि सप्रीती। पठइअ काज नाथ असि नीती।।
स्रोत अभिलेख 2.9 · पुस्तक पृ. 350, 351
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सेवक सदन स्वामि आगमनू। मंगल मूल अमंगल दमनू।।
English explanation
The master’s arrival at his servant’s home is the source of auspiciousness and the dispeller of misfortune.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेवक | सेवक के | of the servant |
| सदन | घर में | at the home |
| स्वामि | स्वामी का | of the master |
| आगमनू | आगमन | arrival |
| मंगल | मंगल का | of auspiciousness |
| मूल | मूल स्रोत | the source |
| अमंगल | अमंगल का | of misfortune |
| दमनू | नाश करने वाला | the dispeller |
2 तदपि उचित जनु बोलि सप्रीती। पठइअ काज नाथ असि नीती।।
English explanation
Nevertheless, my lord, the proper practice is to call the servant affectionately and send him on the task.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| उचित | उचित है | it is proper |
| जनु | सेवक को | the servant |
| बोलि | बुलाकर | having called |
| सप्रीती | प्रेमपूर्वक | affectionately |
| पठइअ | भेजा जाए | should be sent |
| काज | कार्य के लिए | on the task |
| नाथ | हे नाथ | O lord |
| असि | ऐसी | such |
| नीती | रीति है | is the proper practice |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 351
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 350, 351
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।