अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सादर अरघ देइ घर आने। सोरह भाँति पूजि सनमाने।।
मूल पाठ
सादर अरघ देइ घर आने। सोरह भाँति पूजि सनमाने।।
गहे चरन सिय सहित बहोरी। बोले रामु कमल कर जोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.9 · पुस्तक पृ. 350, 351
भावार्थ
मूल पाठ के बादआदरपूर्वक अघ्र्य देकर उन्हें घरमें लाये और षोडशोपचारसे पूजा करके उनका सम्मान किया। फिर सीताजीसहित उनके चरण स्पर्श किये और कमलके समान दोनों हाथोंको जोड़कर श्रीरामजी बोले—
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 350 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सादर अरघ देइ घर आने। सोरह भाँति पूजि सनमाने।।
English explanation
Rama respectfully offered the ceremonial welcome offering, brought his preceptor inside, and honored him with the sixteen customary acts of worship.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| अरघ | अर्घ्य, सम्मान की पूजन-भेंट | a ceremonial welcome offering |
| देइ | देकर | having offered |
| घर | घर में | into the house |
| आने | ले आए | brought him |
| सोरह | सोलह | sixteen |
| भाँति | प्रकार के उपचारों से | with kinds of ritual service |
| पूजि | पूजन करके | having worshipped |
| सनमाने | सम्मान किया | honored him |
2 गहे चरन सिय सहित बहोरी। बोले रामु कमल कर जोरी।।
English explanation
Then Rama, together with Sita, clasped his preceptor’s feet and spoke with his lotus-like hands joined.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गहे | पकड़े | clasped |
| चरन | गुरु के चरण | the preceptor’s feet |
| सिय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| सहित | के साथ | together with |
| बहोरी | फिर | again; then |
| बोले | बोले | spoke |
| रामु | राम | Rama |
| कमल | कमल जैसे | lotus-like |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having joined |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 350
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 350, 351
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।