अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब नरनाहँ बसिष्ठु बोलाए। रामधाम सिख देन पठाए।।
मूल पाठ
तब नरनाहँ बसिष्ठु बोलाए। रामधाम सिख देन पठाए।।
गुर आगमनु सुनत रघुनाथा। द्वार आइ पद नायउ माथा।।
स्रोत अभिलेख 2.9 · पुस्तक पृ. 350, 351
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब राजाने वसिष्ठजीको बुलाया और शिक्षा (समयोचित उपदेश) देनेके लिये श्रीरामचन्द्रजीके महलमें भेजा। गुरुका आगमन सुनते ही श्रीरघुनाथजीने दरवाजेपर आकर उनके चरणोंमें मस्तक नवाया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 350 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब नरनाहँ बसिष्ठु बोलाए। रामधाम सिख देन पठाए।।
English explanation
Then King Dasharatha summoned Vasishtha and sent him to Rama’s residence to give instruction.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| नरनाहँ | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| बसिष्ठु | गुरु वसिष्ठ को | the preceptor Vasishtha |
| बोलाए | बुलाया | summoned |
| रामधाम | राम के निवास पर | to Rama’s residence |
| सिख | उपदेश | instruction |
| देन | देने के लिए | to give |
| पठाए | भेजा | sent |
2 गुर आगमनु सुनत रघुनाथा। द्वार आइ पद नायउ माथा।।
English explanation
On hearing of his preceptor’s arrival, Rama came to the door and bowed his head at his feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु वसिष्ठ का | of the preceptor Vasishtha |
| आगमनु | आगमन | arrival |
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| रघुनाथा | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| द्वार | द्वार पर | at the door |
| आइ | आकर | having come |
| पद | गुरु के चरणों में | at the preceptor’s feet |
| नायउ | झुकाया | bowed |
| माथा | सिर | his head |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 350
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 350, 351
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।