अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभुता तजि प्रभु कीन्ह सनेहू। भयउ पुनीत आजु यहु गेहू।।
मूल पाठ
प्रभुता तजि प्रभु कीन्ह सनेहू। भयउ पुनीत आजु यहु गेहू।।
आयसु होइ सो करौं गोसाई। सेवक लहइ स्वामि सेवकाई।।
स्रोत अभिलेख 2.9 · पुस्तक पृ. 350, 351
भावार्थ
मूल पाठ के बादपरन्तु प्रभु (आप)-ने प्रभुता छोड़कर (स्वयं यहाँ पधारकर) जो स्नेह किया, इससे आज यह घर पवित्र हो गया। हे गोसाईं! [अब] जो आज्ञा हो, मैं वही करूँ। स्वामीकी सेवामें ही सेवकका लाभ है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 351 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रभुता तजि प्रभु कीन्ह सनेहू। भयउ पुनीत आजु यहु गेहू।।
English explanation
My lord, setting aside your superior standing, you have shown affection; today this home has become sanctified.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभुता | स्वामी होने की बड़ाई | the superior standing of a master |
| तजि | छोड़कर | setting aside |
| प्रभु | हे प्रभु, आपने | my lord, you |
| कीन्ह | किया | showed |
| सनेहू | स्नेह | affection |
| भयउ | हो गया | has become |
| पुनीत | पवित्र | sanctified |
| आजु | आज | today |
| यहु | यह | this |
| गेहू | घर | home |
2 आयसु होइ सो करौं गोसाई। सेवक लहइ स्वामि सेवकाई।।
English explanation
My master, whatever your command may be, I shall carry it out. May the servant have the opportunity to serve his master.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आयसु | आज्ञा | command |
| होइ | हो | may be |
| सो | वही | that very thing |
| करौं | मैं करूँ | I shall do |
| गोसाई | हे स्वामी | O master |
| सेवक | सेवक | the servant |
| लहइ | पाए | may obtain |
| स्वामि | स्वामी की | of his master |
| सेवकाई | सेवा का अवसर | the opportunity to serve |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.9
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 351
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 350, 351
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।