अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सृंगबेरपुर भरत दीख जब। भे सनेहँ सब अंग सिथिल तब।।
मूल पाठ
सृंगबेरपुर भरत दीख जब। भे सनेहँ सब अंग सिथिल तब।।
सोहत दिएँ निषादहि लागू। जनु तनु धरें बिनय अनुरागू।।
स्रोत अभिलेख 2.197 · पुस्तक पृ. 506, 507
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतजीने जब शृङ्गवेरपुरको देखा, तब उनके सब अङ्ग प्रेमके कारण शिथिल हो गये। वे निषादको लाग दिये (अर्थात् उसके कंधेपर हाथ रखे चलते हुए) ऐसे शोभा दे रहे हैं, मानो विनय और प्रेम शरीर धारण किये हुए हों॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 506 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सृंगबेरपुर भरत दीख जब। भे सनेहँ सब अंग सिथिल तब।।
English explanation
When Bharata saw Shringaverapura, all his limbs grew weak with affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सृंगबेरपुर | श्रृंगवेरपुर नगर | Shringaverapura, the town |
| भरत | राम के भाई भरत ने | Bharata, Rama’s brother |
| दीख | देखा | saw |
| जब | जब | when |
| भे | हो गए | became |
| सनेहँ | स्नेह के कारण | through affection |
| सब | सभी | all |
| अंग | शरीर के अंग | limbs |
| सिथिल | शिथिल | weak |
| तब | तब | then |
2 सोहत दिएँ निषादहि लागू। जनु तनु धरें बिनय अनुरागू।।
English explanation
Bharata looked graceful with his arm supported by the Nishada chief, as though humility and loving devotion had taken bodily form.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोहत | सुशोभित थे | looked graceful |
| दिएँ | दिए हुए | having given |
| निषादहि | निषादराज गुह को | to Guha, the Nishada chief |
| लागू | बाँह का सहारा | one’s arm for support |
| जनु | मानो | as though |
| तनु | शरीर | bodily form |
| धरें | धारण किए हों | had assumed |
| बिनय | विनम्रता | humility |
| अनुरागू | प्रेमपूर्ण अनुराग | loving devotion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.197
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 506
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 506, 507
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।