अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुरसर सुभग बनज बन चारी। डाबर जोगु कि हंसकुमारी।।
मूल पाठ
सुरसर सुभग बनज बन चारी। डाबर जोगु कि हंसकुमारी।।
अस बिचारि जस आयसु होई। मैं सिख देउँ जानकिहि सोई।।
स्रोत अभिलेख 2.6 · पुस्तक पृ. 393, 394
भावार्थ
मूल पाठ के बाददेवसरोवरके कमलवनमें विचरण करनेवाली हंसिनी क्या गड़ैयों (तलैयों) में रहनेके योग्य है? ऐसा विचारकर जैसी तुम्हारी आज्ञा हो, मैं जानकीको वैसी ही शिक्षा दूँ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 393 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुरसर सुभग बनज बन चारी। डाबर जोगु कि हंसकुमारी।।
English explanation
Is a young female swan that roams among the Ganges’ lovely lotus beds suited to a small, shallow pond?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुरसर | गंगा में | in the Ganges |
| सुभग | सुंदर | lovely |
| बनज | कमलों का | of lotuses |
| बन | समूह; वन | beds; grove |
| चारी | विचरने वाली | roaming among |
| डाबर | छोटा उथला तालाब | a small, shallow pond |
| जोगु | के योग्य; के अनुकूल | suited to |
| कि | क्या | is it? |
| हंसकुमारी | युवा मादा हंस; हंस-कन्या | a young female swan |
2 अस बिचारि जस आयसु होई। मैं सिख देउँ जानकिहि सोई।।
English explanation
Having considered this, I shall give Janaki whatever counsel accords with your instruction.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा; इस प्रकार | thus; this way |
| बिचारि | विचार करके | having considered |
| जस | जैसी | whatever; such as |
| आयसु | आज्ञा | instruction |
| होई | होगी; मिलेगी | may be; is given |
| मैं | मैं, माता | I, the mother |
| सिख | सीख; समझाइश | counsel; advice |
| देउँ | दूँगी | shall give |
| जानकिहि | जानकी अर्थात सीता को | to Janaki, Sita |
| सोई | वही; वैसी ही | that very counsel |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 393
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 393, 394
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