अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं सिय भवन रहै कह अंबा। मोहि कहँ होइ बहुत अवलंबा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमाता कहती हैं—यदि सीता घरमें रहें तो मुझको बहुत सहारा हो जाय। श्रीरामचन्द्रजीने माताकी प्रिय वाणी सुनकर, जो मानो शील और स्नेहरूपी अमृतसे सनी हुई थी,॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 394 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जौं सिय भवन रहै कह अंबा। मोहि कहँ होइ बहुत अवलंबा।।
सुनि रघुबीर मातु प्रिय बानी। सील सनेह सुधाँ जनु सानी।।
स्रोत अभिलेख 2.6 · पुस्तक पृ. 393, 394
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जौं सिय भवन रहै कह अंबा। मोहि कहँ होइ बहुत अवलंबा।।
English explanation
The mother says, ‘If Sita stays at home, she will be a great support to me.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| सिय | सीता | Sita |
| भवन | घर में; राजभवन में | at home; in the palace |
| रहै | रहें | stays |
| कह | कहती हैं | says |
| अंबा | माता | the mother |
| मोहि | मुझे | me |
| कहँ | के लिए; को | for; to |
| होइ | होगा | will be |
| बहुत | बहुत; बड़ा | great; much |
| अवलंबा | सहारा | support |
2 सुनि रघुबीर मातु प्रिय बानी। सील सनेह सुधाँ जनु सानी।।
English explanation
Rama heard his mother’s loving words, as though steeped in the nectar of graciousness and affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s lineage |
| मातु | माता की | his mother’s |
| प्रिय | प्रिय; स्नेहभरी | dear; loving |
| बानी | वाणी; बातें | words; speech |
| सील | शील; विनम्र सद्व्यवहार | graciousness; gentle conduct |
| सनेह | स्नेह | affection |
| सुधाँ | अमृत में | in nectar |
| जनु | मानो | as though |
| सानी | सनी हुई; सराबोर | steeped; suffused |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 394
- सहायक विषय
- श्रीराम-कौसल्या-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 393, 394
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