अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु मंथरा बात फुरि तोरी। दहिनि आँखि नित फरकइ मोरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकैकेयीने कहा—मन्थरा! सुन, तेरी बात सत्य है। मेरी दाहिनी आँख नित्य फड़का करती है। मैं प्रतिदिन रातको बुरे स्वप्र देखती हूँ; किन्तु अपने अज्ञानवश तुझसे कहती नहीं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 360 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनु मंथरा बात फुरि तोरी। दहिनि आँखि नित फरकइ मोरी।।
दिन प्रति देखउँ राति कुसपने। कहउँ न तोहि मोह बस अपने।।
स्रोत अभिलेख 2.2 · पुस्तक पृ. 360, 360
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनु मंथरा बात फुरि तोरी। दहिनि आँखि नित फरकइ मोरी।।
English explanation
“Listen, Manthara, what you say is true. My right eye twitches every day.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| मंथरा | हे मंथरा, कैकेयी की दासी | Manthara, Kaikeyi’s maid |
| बात | बात | statement |
| फुरि | सच्ची | true |
| तोरी | तुम्हारी | your |
| दहिनि | दाहिनी | right |
| आँखि | आँख | eye |
| नित | प्रतिदिन | every day |
| फरकइ | फड़कती है | twitches |
| मोरी | मेरी | my |
2 दिन प्रति देखउँ राति कुसपने। कहउँ न तोहि मोह बस अपने।।
English explanation
“Every night I see bad dreams; under the sway of my own attachment, I do not tell you.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दिन | दिन | day |
| प्रति | हर; प्रत्येक | each; every |
| देखउँ | मैं देखती हूँ | I see |
| राति | रात में | at night |
| कुसपने | बुरे सपने | bad dreams |
| कहउँ | मैं बताती हूँ | I tell |
| न | नहीं | not |
| तोहि | तुम्हें | you |
| मोह | मोह; आसक्ति | attachment; delusion |
| बस | के वश में | under the sway of |
| अपने | अपने ही | my own |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 360
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 360, 360
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