अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहि कहि कोटिक कपट कहानी। धीरजु धरहु प्रबोधिसि रानी।।
मूल पाठ
कहि कहि कोटिक कपट कहानी। धीरजु धरहु प्रबोधिसि रानी।।
फिरा करमु प्रिय लागि कुचाली। बकिहि सराहइ मानि मराली।।
स्रोत अभिलेख 2.2 · पुस्तक पृ. 360, 360
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर कपटकी करोड़ों कहानियाँ कह-कहकर उसने रानीको खूब समझाया कि धीरज रखो! कैकेयीका भाग्य पलट गया, उसे कुचाल प्यारी लगी। वह बगुलीको हंसिनी मानकर (वैरिनको हित मानकर) उसकी सराहना करने लगी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 360 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहि कहि कोटिक कपट कहानी। धीरजु धरहु प्रबोधिसि रानी।।
English explanation
Repeatedly telling countless deceitful stories, Manthara reassured the queen: “Take courage.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहकर | telling |
| कहि | बार-बार कहकर | telling again and again |
| कोटिक | करोड़ों; अनगिनत | millions; countless |
| कपट | छल से भरी | deceitful |
| कहानी | कहानियाँ | stories |
| धीरजु | धैर्य | courage; composure |
| धरहु | रखिए | keep; take |
| प्रबोधिसि | उसने समझाया | she reassured |
| रानी | रानी कैकेयी को | Queen Kaikeyi |
2 फिरा करमु प्रिय लागि कुचाली। बकिहि सराहइ मानि मराली।।
English explanation
Her fortune turned adverse; the scheming Manthara began to seem dear to her. She praises a female heron, taking it for a swan.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फिरा | पलट गया | turned adverse |
| करमु | भाग्य | fortune |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| लागि | लगने लगी | began to seem |
| कुचाली | कुचाल चलने वाली मंथरा | the scheming Manthara |
| बकिहि | बगुली को | a female heron |
| सराहइ | प्रशंसा करती हैं | she praises |
| मानि | समझकर | taking it for |
| मराली | हंसिनी | a female swan |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 360
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 360, 360
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।