अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु नृप जासु बिमुख पछिताहीं। जासु भजन बिनु जरनि न जाहीं।।
मूल पाठ
सुनु नृप जासु बिमुख पछिताहीं। जासु भजन बिनु जरनि न जाहीं।।
भयउ तुम्हार तनय सोइ स्वामी। रामु पुनीत प्रेम अनुगामी।।
स्रोत अभिलेख 2.4 · पुस्तक पृ. 346, 347
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[वसिष्ठजीने कहा—] हे राजन्! सुनिये, जिनसे विमुख होकर लोग पछताते हैं और जिनके भजन बिना जीकी जलन नहीं जाती, वही स्वामी (सर्वलोकमहेश्वर) श्रीरामजी आपके पुत्र हुए हैं, जो पवित्र प्रेमके अनुगामी हैं। [श्रीरामजी पवित्र प्रेमके पीछे-पीछे चलनेवाले हैं, इसीसे तो प्रेमवश आपके पुत्र हुए हैं]॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 347 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनु नृप जासु बिमुख पछिताहीं। जासु भजन बिनु जरनि न जाहीं।।
English explanation
Listen, O king: the one from whom people turn away and then regret it, and without whose worship their inner burning does not cease—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनिए | listen |
| नृप | हे राजा | O king |
| जासु | जिनसे | from whom |
| बिमुख | विमुख होकर | turning away |
| पछिताहीं | लोग पछताते हैं | people regret it |
| जासु | जिनके | whose |
| भजन | भजन | devotional worship |
| बिनु | बिना | without |
| जरनि | मन की जलन | inner burning |
| न | नहीं | not |
| जाहीं | दूर होती | goes away |
2 भयउ तुम्हार तनय सोइ स्वामी। रामु पुनीत प्रेम अनुगामी।।
English explanation
That same Lord has become your son—Rama, who responds to pure love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयउ | बने हैं | has become |
| तुम्हार | आपके | your |
| तनय | पुत्र | son |
| सोइ | वही | that same |
| स्वामी | स्वामी | Lord |
| रामु | राम | Rama |
| पुनीत | पवित्र | pure |
| प्रेम | प्रेम के | love |
| अनुगामी | अनुसार चलने वाले | one who responds to |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 347
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 346, 347
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।