अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सुर बिनय ठाढ़ि पछिताती। भइउँ सरोज बिपिन हिमराती।।
मूल पाठ
सुनि सुर बिनय ठाढ़ि पछिताती। भइउँ सरोज बिपिन हिमराती।।
देखि देव पुनि कहहिं निहोरी। मातु तोहि नहिं थोरिउ खोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.12 · पुस्तक पृ. 353, 353
भावार्थ
मूल पाठ के बाददेवताओंकी विनती सुनकर सरस्वतीजी खड़ी-खड़ी पछता रही हैं कि [हाय!] मैं कमलवनके लिये हेमन्त-ऋतुकी रात हुई। उन्हें इस प्रकार पछताते देखकर देवता फिर विनय करके कहने लगे— हे माता! इसमें आपको जरा भी दोष न लगेगा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 353 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि सुर बिनय ठाढ़ि पछिताती। भइउँ सरोज बिपिन हिमराती।।
English explanation
AI-draft meaning: Hearing the gods’ plea, Saraswati stands regretting: ‘I have become a frosty night for a forest of lotuses.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सुर | देवताओं की | of the gods |
| बिनय | विनती | plea |
| ठाढ़ि | खड़ी हुई | standing |
| पछिताती | पछताती हुई | regretting |
| भइउँ | मैं हो गई हूँ | I have become |
| सरोज | कमलों के | of lotuses |
| बिपिन | वन के लिए | for a forest |
| हिमराती | पाले वाली रात | a frosty night |
2 देखि देव पुनि कहहिं निहोरी। मातु तोहि नहिं थोरिउ खोरी।।
English explanation
Seeing her condition, the gods plead again: ‘Mother, you bear not even the slightest blame.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| देव | देवता | the gods |
| पुनि | फिर | again |
| कहहिं | कहते हैं | say |
| निहोरी | विनती करके | imploring |
| मातु | हे माता | O Mother |
| तोहि | तुम्हारा | yours |
| नहिं | नहीं | not |
| थोरिउ | थोड़ा भी | even the slightest |
| खोरी | दोष | fault or blame |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 353
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 353, 353
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।