अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिसमय हरष रहित रघुराऊ। तुम्ह जानहु सब राम प्रभाऊ।।
मूल पाठ
बिसमय हरष रहित रघुराऊ। तुम्ह जानहु सब राम प्रभाऊ।।
जीव करम बस सुख दुख भागी। जाइअ अवध देव हित लागी।।
स्रोत अभिलेख 2.12 · पुस्तक पृ. 353, 353
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरघुनाथजी विषाद और हर्षसे रहित हैं। आप तो श्रीरामजीके सब प्रभावको जानती ही हैं। जीव अपने कर्मवश ही सुख-दु:खका भागी होता है। अतएव देवताओंके हितके लिये आप अयोध्या जाइये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 353 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिसमय हरष रहित रघुराऊ। तुम्ह जानहु सब राम प्रभाऊ।।
English explanation
‘Rama, king of Raghu’s line, is free from astonishment and elation; you know the full extent of Rama’s power.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिसमय | विस्मय | astonishment |
| हरष | हर्ष | elation |
| रहित | से रहित | free from |
| रघुराऊ | रघुकुल के राजा राम | Rama, king of Raghu’s line |
| तुम्ह | तुम | you |
| जानहु | जानती हो | know |
| सब | सारा | all |
| राम | राम का | of Rama |
| प्रभाऊ | प्रभाव और सामर्थ्य | power and might |
2 जीव करम बस सुख दुख भागी। जाइअ अवध देव हित लागी।।
English explanation
‘Living beings experience happiness and sorrow under the sway of their deeds. Please go to Ayodhya for the gods’ benefit.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जीव | जीव | a living being |
| करम | कर्म के | of deeds |
| बस | वश में | under the sway |
| सुख | सुख का | of happiness |
| दुख | दुःख का | of sorrow |
| भागी | भोगने वाला | one who experiences |
| जाइअ | जाइए | please go |
| अवध | अयोध्या | Ayodhya |
| देव | देवताओं के | of the gods |
| हित | हित के | benefit |
| लागी | लिए | for the sake of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 353
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 353, 353
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।