अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बार बार गहि चरन सँकोचौ। चली बिचारि बिबुध मति पोची।।
मूल पाठ
बार बार गहि चरन सँकोचौ। चली बिचारि बिबुध मति पोची।।
ऊँच निवासु नीचि करतूती। देखि न सकहिं पराइ बिभूती।।
स्रोत अभिलेख 2.12 · पुस्तक पृ. 353, 353
भावार्थ
मूल पाठ के बादबार-बार चरण पकड़कर देवताओंने सरस्वतीको संकोचमें डाल दिया। तब वह यह विचारकर चली कि देवताओंकी बुद्धि ओछी है। इनका निवास तो ऊँचा है, पर इनकी करनी नीची है। ये दूसरेका ऐश्वर्य नहीं देख सकते॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 353 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बार बार गहि चरन सँकोचौ। चली बिचारि बिबुध मति पोची।।
English explanation
By repeatedly clasping her feet, the gods made her feel obliged. Reflecting that the gods’ judgment was petty, Saraswati set out.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार | after time |
| गहि | पकड़कर | clasping |
| चरन | चरण | her feet |
| सँकोचौ | संकोच में डाल दिया | made her feel obliged |
| चली | चलीं | set out |
| बिचारि | विचारकर | reflecting |
| बिबुध | देवताओं की | of the gods |
| मति | बुद्धि | judgment |
| पोची | ओछी | petty |
2 ऊँच निवासु नीचि करतूती। देखि न सकहिं पराइ बिभूती।।
English explanation
‘Their dwelling is lofty, but their conduct is low; they cannot bear to see others’ prosperity.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ऊँच | ऊँचा | lofty |
| निवासु | निवास | dwelling |
| नीचि | नीची | low |
| करतूती | करनी | conduct |
| देखि | देखना सहन कर | bear to see |
| न | नहीं | not |
| सकहिं | सकते हैं | can |
| पराइ | दूसरों की | others’ |
| बिभूती | समृद्धि | prosperity |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 353
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 353, 353
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।