अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आगिल काजु बिचारि बहोरी। करहहिं चाह कुसल कबि मोरी।।
मूल पाठ
आगिल काजु बिचारि बहोरी। करहहिं चाह कुसल कबि मोरी।।
हरषि हृदयँ दसरथ पुर आई। जनु ग्रह दसा दुसह दुखदाई।।
स्रोत अभिलेख 2.12 · पुस्तक पृ. 353, 353
भावार्थ
मूल पाठ के बादपरंतु आगेके कामका विचार करके (श्रीरामजीके वन जानेसे राक्षसोंका वध होगा, जिससे सारा जगत् सुखी हो जायगा) चतुर कवि [श्रीरामजीके वनवासके चरित्रोंका वर्णन करनेके लिये] मेरी चाह (कामना) करेंगे। ऐसा विचारकर सरस्वती हृदयमें हॢषत होकर दशरथजीकी पुरी अयोध्यामें आयीं, मानो दु:सह दु:ख देनेवाली कोई ग्रहदशा आयी हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 353 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 आगिल काजु बिचारि बहोरी। करहहिं चाह कुसल कबि मोरी।।
English explanation
Then Saraswati considered the work ahead: ‘Poets will wish for my well-being.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आगिल | आगे का | ahead |
| काजु | कार्य | work |
| बिचारि | विचारकर | considering |
| बहोरी | फिर | then again |
| करहहिं | करेंगे | will make |
| चाह | कामना | a wish |
| कुसल | कुशलता की | for well-being |
| कबि | कवि | poets |
| मोरी | मेरी | my |
2 हरषि हृदयँ दसरथ पुर आई। जनु ग्रह दसा दुसह दुखदाई।।
English explanation
Joyful at heart, Saraswati arrived in Dasharatha’s city, as though a planetary period bringing unbearable sorrow had arrived.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषि | प्रसन्न होकर | rejoicing |
| हृदयँ | हृदय में | in her heart |
| दसरथ | राजा दशरथ की | of King Dasharatha |
| पुर | नगरी में | in the city |
| आई | आईं | arrived |
| जनु | मानो | as though |
| ग्रह | ग्रहों की | planetary |
| दसा | दशा | period of influence |
| दुसह | असह्य | unbearable |
| दुखदाई | दुःख देने वाली | bringing sorrow |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 353
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 353, 353
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