अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सुर बचन लखन सकुचाने। राम सीयँ सादर सनमाने।।
मूल पाठ
सुनि सुर बचन लखन सकुचाने। राम सीयँ सादर सनमाने।।
कही तात तुम्ह नीति सुहाई। सब तें कठिन राजमदु भाई।।
स्रोत अभिलेख 2.231 · पुस्तक पृ. 535, 536
भावार्थ
मूल पाठ के बाददेववाणी सुनकर लक्ष्मणजी सकुचा गये। श्रीरामचन्द्रजी और सीताजीने उनका आदरके साथ सम्मान किया [और कहा—] हे तात! तुमने बड़ी सुन्दर नीति कही। हे भाई! राज्यका मद सबसे कठिन मद है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 536 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि सुर बचन लखन सकुचाने। राम सीयँ सादर सनमाने।।
English explanation
Hearing the divine words, Lakshmana felt abashed. Rama and Sita honored him respectfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सुर | देवता के | divine; of a deity |
| बचन | वचन | words |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| सकुचाने | संकुचित हुए; सकुचा गए | felt abashed |
| राम | राम ने | Rama |
| सीयँ | सीता ने | Sita |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| सनमाने | सम्मान किया | honored him |
2 कही तात तुम्ह नीति सुहाई। सब तें कठिन राजमदु भाई।।
English explanation
Rama said: Dear one, you have spoken sound counsel. Brother, the intoxication of royal power is the hardest of all to withstand.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कही | कही है | have spoken |
| तात | हे प्रिय | dear one |
| तुम्ह | तुमने | you |
| नीति | नीति; विवेकपूर्ण बात | sound counsel |
| सुहाई | सुंदर; अच्छी | excellent |
| सब | सब | all |
| तें | से | than |
| कठिन | कठिन; दुर्जय | hard to withstand |
| राजमदु | राजसत्ता का मद | intoxication of royal power |
| भाई | हे भाई | brother |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.231
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 536
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 535, 536
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।