अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जो अचवँत नृप मातहिं तेई। नाहिन साधुसभा जेहिं सेई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजिन्होंने साधुओंकी सभाका सेवन (सत्सङ्ग) नहीं किया, वे ही राजा राजमदरूपी मदिराका आचमन करते ही (पीते ही) मतवाले हो जाते हैं। हे लक्ष्मण ! सुनो, भरत-सरीखा उत्तम पुरुष ब्रह्माकी सृष्टिमें न तो कहीं सुना गया है, न देखा ही गया है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 536 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जो अचवँत नृप मातहिं तेई। नाहिन साधुसभा जेहिं सेई।।
सुनहु लखन भल भरत सरीसा। बिधि प्रपंच महँ सुना न दीसा।।
स्रोत अभिलेख 2.231 · पुस्तक पृ. 535, 536
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जो अचवँत नृप मातहिं तेई। नाहिन साधुसभा जेहिं सेई।।
English explanation
Only those kings who have not sought the company of holy people become intoxicated upon tasting royal power.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो; जो राजा | those who |
| अचवँत | स्वाद लेते ही; चखते ही | upon tasting |
| नृप | राजा | kings |
| मातहिं | मद में चूर होते हैं | become intoxicated |
| तेई | वे ही | those alone |
| नाहिन | नहीं | not |
| साधुसभा | साधुओं की सभा | the company of holy people |
| जेहिं | जिन्होंने | who |
| सेई | सेवन किया; संगति की | sought; associated with |
2 सुनहु लखन भल भरत सरीसा। बिधि प्रपंच महँ सुना न दीसा।।
English explanation
Listen, Lakshmana: in Brahma’s creation, no one as good as Bharata has been heard of or seen.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनो | listen |
| लखन | हे लक्ष्मण | Lakshmana |
| भल | भला; सज्जन | good; virtuous |
| भरत | भरत; राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| सरीसा | के समान | like |
| बिधि | ब्रह्मा की | Brahma’s |
| प्रपंच | सृष्टि | creation |
| महँ | में | in |
| सुना | सुना गया | heard of |
| न | नहीं | not |
| दीसा | देखा गया | seen |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.231
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 536
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 535, 536
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