अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सुरुप बूझहिं अकुलाई। अब लगि गए कहाँ लगि भाई।।
मूल पाठ
सुनि सुरुप बूझहिं अकुलाई। अब लगि गए कहाँ लगि भाई।।
समरथ धाइ बिलोकहिं जाई। प्रमुदित फिरहिं जनमफलु पाई।।
स्रोत अभिलेख 2.121 · पुस्तक पृ. 444, 444
भावार्थ
मूल पाठ के बादउनके सौन्दर्यको सुनकर वे व्याकुल होकर पूछते हैं कि भाई! अबतक वे कहाँतक गये होंगे? और जो समर्थ हैं वे दौड़ते हुए जाकर उनके दर्शन कर लेते हैं और जन्मका परम फल पाकर, विशेष आनन्दित होकर लौटते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 444 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनि सुरुप बूझहिं अकुलाई। अब लगि गए कहाँ लगि भाई।।
English explanation
Hearing of their beautiful appearance, they anxiously ask, ‘Brother, how far have they gone by now?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सुरुप | सुंदर रूप | beautiful appearance |
| बूझहिं | पूछते हैं | ask |
| अकुलाई | व्याकुल होकर | anxiously |
| अब | अब | now |
| लगि | तक | by |
| गए | गए हैं | have gone |
| कहाँ | कहाँ | where |
| लगि | तक | as far as |
| भाई | हे भाई | brother |
2 समरथ धाइ बिलोकहिं जाई। प्रमुदित फिरहिं जनमफलु पाई।।
English explanation
Those able to do so run there and see them; having gained the fulfillment of their lives, they return delighted.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समरथ | जाने में समर्थ लोग | those able to go |
| धाइ | दौड़कर | running |
| बिलोकहिं | देखते हैं | see them |
| जाई | जाकर | having gone there |
| प्रमुदित | अत्यंत प्रसन्न | delighted |
| फिरहिं | लौटते हैं | return |
| जनमफलु | जीवन का फल; जन्म की सार्थकता | the fulfillment of life |
| पाई | पाकर | having obtained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 444
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 444, 444
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।