अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सुरबर सुरगुर बर बानी। भा प्रमोदु मन मिटी गलानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददेवगुरु बृहस्पतिजीकी श्रेष्ठ वाणी सुनकर इन्द्रके मनमें बड़ा आनन्द हुआ और उनकी चिन्ता मिट गयी। तब हर्षित होकर देवराज फूल बरसाकर भरतजीके स्वभावकी सराहना करने लगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 526 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि सुरबर सुरगुर बर बानी। भा प्रमोदु मन मिटी गलानी।।
बरषि प्रसून हरषि सुरराऊ। लगे सराहन भरत सुभाऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.22 · पुस्तक पृ. 526, 527
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनि सुरबर सुरगुर बर बानी। भा प्रमोदु मन मिटी गलानी।।
English explanation
Hearing the excellent words of the gods’ preceptor, Indra felt joy in his heart, and his distress vanished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सुरबर | श्रेष्ठ देव, इंद्र | Indra, foremost among the gods |
| सुरगुर | देवगुरु बृहस्पति की | of Brihaspati, the gods’ preceptor |
| बर | उत्तम | excellent |
| बानी | वाणी | words |
| भा | हुआ | arose |
| प्रमोदु | आनंद | joy |
| मन | मन में | in the heart |
| मिटी | मिट गई | vanished |
| गलानी | खिन्नता | distress |
2 बरषि प्रसून हरषि सुरराऊ। लगे सराहन भरत सुभाऊ।।
English explanation
Rejoicing, Indra showered flowers and began praising Bharata’s character.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरषि | बरसाकर | having showered |
| प्रसून | फूल | flowers |
| हरषि | प्रसन्न होकर | rejoicing |
| सुरराऊ | देवराज इंद्र | Indra, king of the gods |
| लगे | लगे | began |
| सराहन | प्रशंसा करने | to praise |
| भरत | भरत के | Bharata’s |
| सुभाऊ | सुंदर स्वभाव की | noble character |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 526
- सहायक विषय
- इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 526, 527
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।