अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सत्यसंध प्रभु सुर हितकारी। भरत राम आयस अनुसारी।।
मूल पाठ
सत्यसंध प्रभु सुर हितकारी। भरत राम आयस अनुसारी।।
स्वारथ बिबस बिकल तुम्ह होहू। भरत दोसु नहिं राउर मोहू।।
स्रोत अभिलेख 2.22 · पुस्तक पृ. 526, 527
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभु श्रीरामचन्द्रजी सत्यप्रतिज्ञ और देवताओंका हित करनेवाले हैं। और भरतजी श्रीरामजीकी आज्ञाके अनुसार चलनेवाले हैं। तुम व्यर्थ ही स्वार्थके विशेष वश होकर व्याकुल हो रहे हो। इसमें भरतजीका कोई दोष नहीं, तुम्हारा ही मोह है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 526 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सत्यसंध प्रभु सुर हितकारी। भरत राम आयस अनुसारी।।
English explanation
Lord Rama is true to his promises and benefits the gods; Bharata follows Rama’s command.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत्यसंध | सत्यप्रतिज्ञ | true to his promises |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| सुर | देवताओं के | of the gods |
| हितकारी | हित करने वाले | benefactor |
| भरत | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| राम | राम की | Rama’s |
| आयस | आज्ञा | command |
| अनुसारी | अनुसरण करने वाले | one who follows |
2 स्वारथ बिबस बिकल तुम्ह होहू। भरत दोसु नहिं राउर मोहू।।
English explanation
You are becoming distraught under the sway of self-interest. Bharata is not at fault; this is your own delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्वारथ | अपने स्वार्थ के | of self-interest |
| बिबस | वश में | under the sway |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| तुम्ह | तुम | you |
| होहू | हो रहे हो | are becoming |
| भरत | भरत का | Bharata’s |
| दोसु | दोष | fault |
| नहिं | नहीं है | is not |
| राउर | तुम्हारा | your |
| मोहू | मोह | delusion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 526
- सहायक विषय
- इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 526, 527
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।