अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि भरत चले मग जाहीं। दसा देखि मुनि सिद्ध सिहाहीं।।
मूल पाठ
एहि बिधि भरत चले मग जाहीं। दसा देखि मुनि सिद्ध सिहाहीं।।
जबहिं रामु कहि लेहिं उसासा। उमगत पेमु मनहँ चहु पासा।।
स्रोत अभिलेख 2.22 · पुस्तक पृ. 526, 527
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकार भरतजी मार्गमें चले जा रहे हैं। उनकी [प्रेममयी] दशा देखकर मुनि और सिद्ध लोग भी सिहाते हैं। भरतजी जभी 'राम कहकर लंबी साँस लेते हैं, तभी मानो चारों ओर प्रेम उमड़ पड़ता है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 526 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एहि बिधि भरत चले मग जाहीं। दसा देखि मुनि सिद्ध सिहाहीं।।
English explanation
In this way Bharata proceeds along the road. Seeing his condition, sages and perfected beings admire his blessed state.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| भरत | भरत | Bharata |
| चले | आगे बढ़ते | proceeding |
| मग | मार्ग पर | along the road |
| जाहीं | जाते हैं | continue going |
| दसा | उनकी दशा | his condition |
| देखि | देखकर | seeing |
| मुनि | मुनि | sages |
| सिद्ध | सिद्ध पुरुष | spiritually perfected beings |
| सिहाहीं | सौभाग्य की सराहना करते हैं | admire his blessed state |
2 जबहिं रामु कहि लेहिं उसासा। उमगत पेमु मनहँ चहु पासा।।
English explanation
Whenever Bharata sighs while saying ‘Rama,’ love seems to well up all around.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जबहिं | जब भी | whenever |
| रामु | राम का नाम | Rama’s name |
| कहि | कहकर | saying |
| लेहिं | लेते हैं | takes |
| उसासा | आह | a sigh |
| उमगत | उमड़ता है | wells up |
| पेमु | प्रेम | love |
| मनहँ | मानो | as though |
| चहु | चारों | all four |
| पासा | ओर | directions |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 526
- सहायक विषय
- इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 526, 527
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