अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
द्रवहिं बचन सुनि कुलिस पषाना। पुरजन पेमु न जाइ बखाना।।
मूल पाठ
द्रवहिं बचन सुनि कुलिस पषाना। पुरजन पेमु न जाइ बखाना।।
बीच बास करि जमुनहिं आए। निरखि नीरु लोचन जल छाए।।
स्रोत अभिलेख 2.22 · पुस्तक पृ. 526, 527
भावार्थ
मूल पाठ के बादउनके [प्रेम और दीनतासे पूर्ण] वचनोंको सुनकर वज्र और पत्थर भी पिघल जाते हैं। अयोध्यावासियोंका प्रेम कहते नहीं बनता। बीचमें निवास (मुकाम) करके भरतजी यमुनाजीके तटपर आये। यमुनाजीका जल देखकर उनके नेत्रोंमें जल भर आया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 526 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 द्रवहिं बचन सुनि कुलिस पषाना। पुरजन पेमु न जाइ बखाना।।
English explanation
Even thunderbolts and stones melt on hearing his words; the townspeople’s love is beyond description.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| द्रवहिं | पिघल जाते हैं | melt |
| बचन | वचन | his words |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| कुलिस | वज्र | thunderbolts |
| पषाना | पत्थर | stones |
| पुरजन | नगरवासियों का | the townspeople’s |
| पेमु | प्रेम | love |
| न | नहीं | not |
| जाइ | किया जा सकता | can be |
| बखाना | वर्णन | described |
2 बीच बास करि जमुनहिं आए। निरखि नीरु लोचन जल छाए।।
English explanation
After stopping to stay along the way, they reached the Yamuna. Seeing its water, their eyes filled with tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बीच | बीच मार्ग में | along the way |
| बास | पड़ाव | a stay |
| करि | करके | having made |
| जमुनहिं | यमुना नदी पर | at the Yamuna River |
| आए | आए | arrived |
| निरखि | देखकर | seeing |
| नीरु | जल | its water |
| लोचन | आँखों में | in their eyes |
| जल | आँसू | tears |
| छाए | भर आए | welled up |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 526
- सहायक विषय
- इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 526, 527
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।