अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सुमंत्रु सिय सीतलि बानी। भयउ बिकल जनु फनि मनि हानी।।
मूल पाठ
सुनि सुमंत्रु सिय सीतलि बानी। भयउ बिकल जनु फनि मनि हानी।।
नयन सूझ नहिं सुनइ न काना। कहि न सकइ कछु अति अकुलाना।।
स्रोत अभिलेख 2.99 · पुस्तक पृ. 425, 425
भावार्थ
मूल पाठ के बादसुमन्त्र सीताजीकी शीतल वाणी सुनकर ऐसे व्याकुल हो गये, जैसे साँप मणि खो जानेपर। नेत्रोंसे कुछ सूझता नहीं, कानोंसे सुनायी नहीं देता। वे बहुत व्याकुल हो गये, कुछ कह नहीं सकते॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 425 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि सुमंत्रु सिय सीतलि बानी। भयउ बिकल जनु फनि मनि हानी।।
English explanation
Hearing Sita's soothing words, Sumantra became distraught like a serpent that has lost its jewel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सुमंत्रु | दशरथ के मंत्री और सारथी सुमंत्र | Sumantra, Dasharatha's minister and charioteer |
| सिय | सीता की | Sita's |
| सीतलि | शीतल, सांत्वना देने वाली | soothing |
| बानी | वाणी | words |
| भयउ | हो गए | became |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| जनु | मानो | as though |
| फनि | सर्प | a serpent |
| मनि | मणि की | of its jewel |
| हानी | हानि होने पर | upon losing it |
2 नयन सूझ नहिं सुनइ न काना। कहि न सकइ कछु अति अकुलाना।।
English explanation
His eyes cannot see and his ears cannot hear; he cannot say anything and is deeply distressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नयन | आँखों को | to his eyes |
| सूझ | दिखाई देता | is visible |
| नहिं | नहीं | not |
| सुनइ | सुनते हैं | hear |
| न | नहीं | not |
| काना | कान | ears |
| कहि | कह | say |
| न | नहीं | not |
| सकइ | सकते | can |
| कछु | कुछ भी | anything |
| अति | अत्यंत | extremely |
| अकुलाना | व्याकुल हो गए | became distressed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.99
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 425
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 425, 425
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।