अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम प्रबोधु कीन्ह बहु भाँति। तदपि होति नहिं सीतलि छाती।।
मूल पाठ
राम प्रबोधु कीन्ह बहु भाँति। तदपि होति नहिं सीतलि छाती।।
जतन अनेक साथ हित कीन्हे। उचित उतर रघुनंदन दीन्हे।।
स्रोत अभिलेख 2.99 · पुस्तक पृ. 425, 425
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीने उनका बहुत प्रकारसे समाधान किया। तो भी उनकी छाती ठंडी न हुई। साथ चलनेके लिये मन्त्रीने अनेकों यत्न किये (युक्तियाँ पेश कीं), पर रघुनन्दन श्रीरामजी [उन सब युक्तियोंका] यथोचित उत्तर देते गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 425 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम प्रबोधु कीन्ह बहु भाँति। तदपि होति नहिं सीतलि छाती।।
English explanation
Rama consoled him in many ways, yet his heart found no peace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम ने | Rama |
| प्रबोधु | समझाना और सांत्वना देना | counsel and consolation |
| कीन्ह | किया | gave |
| बहु | अनेक | many |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| होति | होती | becomes |
| नहिं | नहीं | not |
| सीतलि | शांत | calm |
| छाती | छाती, हृदय | his heart |
2 जतन अनेक साथ हित कीन्हे। उचित उतर रघुनंदन दीन्हे।।
English explanation
Sumantra made many efforts to take them back with him; Rama, the delight of Raghu's lineage, gave fitting replies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जतन | प्रयास | efforts |
| अनेक | अनेक | many |
| साथ | अपने साथ ले जाने | taking them along with him |
| हित | के लिए | for the purpose of |
| कीन्हे | किए | made |
| उचित | उपयुक्त | fitting |
| उतर | उत्तर | replies |
| रघुनंदन | रघुकुल को आनंद देने वाले राम ने | Rama, delight of Raghu's lineage |
| दीन्हे | दिए | gave |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.99
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 425
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 425, 425
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