अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्राननाथ प्रिय देवर साथा। बीर धुरीन धरें धनु भाथा।।
मूल पाठ
प्राननाथ प्रिय देवर साथा। बीर धुरीन धरें धनु भाथा।।
नहिं मग श्रमु भ्रमु दुख मन मोरें। मोहि लगि सोचु करिअ जनि भोरें।।
स्रोत अभिलेख 2.99 · पुस्तक पृ. 425, 425
भावार्थ
मूल पाठ के बादवीरोंमें अग्रगण्य तथा धनुष और [बाणोंसे भरे] तरकश धारण किये मेरे प्राणनाथ और प्यारे देवर साथ हैं। इससे मुझे न रास्तेकी थकावट है, न भ्रम है, और न मेरे मनमें कोई दु:ख ही है। आप मेरे लिये भूलकर भी सोच न करें॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 425 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्राननाथ प्रिय देवर साथा। बीर धुरीन धरें धनु भाथा।।
English explanation
My beloved husband and dear brother-in-law are with me; both are foremost warriors bearing bows and quivers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्राननाथ | प्राणप्रिय पति राम | Rama, my dearly beloved husband |
| प्रिय | प्यारे | dear |
| देवर | पति के छोटे भाई लक्ष्मण | Lakshmana, my husband's younger brother |
| साथा | साथ हैं | are with me |
| बीर | वीर योद्धा | brave warriors |
| धुरीन | अग्रणी, श्रेष्ठ | foremost, outstanding |
| धरें | धारण किए हुए हैं | are bearing |
| धनु | धनुष | bows |
| भाथा | तरकश | quivers |
2 नहिं मग श्रमु भ्रमु दुख मन मोरें। मोहि लगि सोचु करिअ जनि भोरें।।
English explanation
I feel no weariness, confusion, or sorrow on the journey. Do not worry about me, even inadvertently.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नहिं | नहीं है | there is no |
| मग | मार्ग का | of the journey |
| श्रमु | थकान | weariness |
| भ्रमु | भ्रम या संशय | confusion or doubt |
| दुख | दुःख | sorrow |
| मन | मन में | in the mind |
| मोरें | मेरे | my |
| मोहि | मेरे | me |
| लगि | लिए | for |
| सोचु | चिंता | worry |
| करिअ | कीजिए | please do |
| जनि | मत | do not |
| भोरें | भूलकर भी | even inadvertently |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.99
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 425
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 425, 425
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।