अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सुधि सोच बिकल सब लोगा। मनहुँ मीनगन नव जल जोगा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयह समाचार सुनकर सब लोग सोचसे व्याकुल हो गये; जैसे नये (पहली वर्षाके) जलके संयोगसे मछलियाँ व्याकुल होती हैं। देवताओंने पहले कुलगुरु वसिष्ठजीकी [प्रेमविह्वल] दशा देखी, फिर विदेहजीके विशेष स्नेहको देखा;॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 589 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि सुधि सोच बिकल सब लोगा। मनहुँ मीनगन नव जल जोगा।।
देवँ प्रथम कुलगुर गति देखी। निरखि बिदेह सनेह बिसेषी।।
स्रोत अभिलेख 2.294 · पुस्तक पृ. 589, 590
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि सुधि सोच बिकल सब लोगा। मनहुँ मीनगन नव जल जोगा।।
English explanation
Hearing the news, everyone became distraught with anxiety, like a shoal of fish encountering new water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सुधि | समाचार | the news |
| सोच | चिंता से | with anxiety |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| सब | सभी | all |
| लोगा | लोग | people |
| मनहुँ | मानो | as though |
| मीनगन | मछलियों के समूह | shoals of fish |
| नव | नए | new |
| जल | जल के | water |
| जोगा | संपर्क में आने पर | upon coming into contact with |
2 देवँ प्रथम कुलगुर गति देखी। निरखि बिदेह सनेह बिसेषी।।
English explanation
The gods first observed the family preceptor’s state, then beheld the exceptional affection of Janaka, king of Videha.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देवँ | देवताओं ने | the gods |
| प्रथम | पहले | first |
| कुलगुर | कुलगुरु वसिष्ठ की | of Vasishtha, the family preceptor |
| गति | दशा अथवा मनोभाव | state or disposition |
| देखी | देखी | observed |
| निरखि | देखकर; देखा | having beheld |
| बिदेह | विदेहराज जनक का | of Janaka, king of Videha |
| सनेह | स्नेह | affection |
| बिसेषी | विशेष अथवा अत्यधिक | exceptional or intense |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.294
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 589
- सहायक विषय
- जनक-वसिष्ठादि-संवाद, इन्द्रकी चिन्ता, सरस्वतीका इन्द्रको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 589, 590
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।