अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम भगतिमय भरतु निहारे। सुर स्वारथी हहरि हियँ हारे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऔर तब श्रीरामभक्तिसे ओतप्रोत भरतजीको देखा। इन सबको देखकर स्वार्थी देवता घबड़ाकर हृदयमें हार मान गये (निराश हो गये)। उन्होंने सब किसीको श्रीरामप्रेममें सराबोर देखा। इससे देवता इतने सोचके वश हो गये कि जिसका कोई हिसाब नहीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 590 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम भगतिमय भरतु निहारे। सुर स्वारथी हहरि हियँ हारे।।
सब कोउ राम पेममय पेखा। भउ अलेख सोच बस लेखा।।
स्रोत अभिलेख 2.294 · पुस्तक पृ. 589, 590
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम भगतिमय भरतु निहारे। सुर स्वारथी हहरि हियँ हारे।।
English explanation
Seeing Bharata wholly filled with devotion to Rama, the self-interested gods grew alarmed and lost heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के प्रति | toward Rama |
| भगतिमय | भक्ति से पूर्ण | filled with devotion |
| भरतु | भरत को | Bharata |
| निहारे | देखा | beheld |
| सुर | देवता | the gods |
| स्वारथी | अपने हित की चिंता करने वाले | concerned with their own interests |
| हहरि | घबराकर | becoming alarmed |
| हियँ | हृदय में | at heart |
| हारे | हिम्मत हार गए | lost courage |
2 सब कोउ राम पेममय पेखा। भउ अलेख सोच बस लेखा।।
English explanation
The gods saw everyone filled with love for Rama; overwhelmed by anxiety, they reckoned their fear immeasurable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सब | every |
| कोउ | व्यक्ति को | person |
| राम | राम के प्रति | for Rama |
| पेममय | प्रेम से पूर्ण | filled with love |
| पेखा | देखा | saw |
| भउ | भय | fear |
| अलेख | अपरिमित; जिसका लेखा न हो सके | immeasurable; beyond reckoning |
| सोच | चिंता के | of anxiety |
| बस | वश में | under the sway |
| लेखा | जाना अथवा आँका | reckoned or judged |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.294
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 590
- सहायक विषय
- जनक-वसिष्ठादि-संवाद, इन्द्रकी चिन्ता, सरस्वतीका इन्द्रको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 589, 590
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।