अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सुत बचन कहति कैकेई। मरमु पाँछि जनु माहुर देई।।
मूल पाठ
सुनि सुत बचन कहति कैकेई। मरमु पाँछि जनु माहुर देई।।
आदिहु तें सब आपनि करनी। कुटिल कठोर मुदित मन बरनी।।
स्रोत अभिलेख 2.16 · पुस्तक पृ. 476, 477
भावार्थ
मूल पाठ के बादपुत्रका वचन सुनकर कैकेयी कहने लगी। मानो मर्मस्थानको पाछकर (चाकूसे चीरकर) उसमें जहर भर रही हो। कुटिल और कठोर कैकेयीने अपनी सब करनी शुरूसे [आखीरतक बड़े] प्रसन्न मनसे सुना दी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 476 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि सुत बचन कहति कैकेई। मरमु पाँछि जनु माहुर देई।।
English explanation
Hearing her son’s words, Kaikeyi began speaking, as though probing a wound in a vital spot and applying poison.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सुत | पुत्र के | her son’s |
| बचन | वचन | words |
| कहति | कहने लगीं | began speaking |
| कैकेई | कैकेयी, भरत की माता | Kaikeyi, Bharata’s mother |
| मरमु | मर्मस्थल के घाव को | a wound in a vital spot |
| पाँछि | कुरेदकर | having probed |
| जनु | मानो | as though |
| माहुर | विष | poison |
| देई | देती हों; डालती हों | were applying |
2 आदिहु तें सब आपनि करनी। कुटिल कठोर मुदित मन बरनी।।
English explanation
Devious and hard-hearted, Kaikeyi cheerfully recounted all her deeds from the very beginning.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आदिहु | आरंभ ही | the very beginning |
| तें | से | from |
| सब | सारी | all |
| आपनि | अपनी | her own |
| करनी | करनी; किए हुए कार्य | deeds; actions |
| कुटिल | कुटिल | devious |
| कठोर | कठोर हृदय वाली | hard-hearted |
| मुदित | प्रसन्न | pleased |
| मन | मन से | at heart |
| बरनी | वर्णन किया | recounted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 476
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 476, 477
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