अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सनेह बस उठि नरनाहाँ। बैठारे रघुपति गहि बाहाँ।।
मूल पाठ
सुनि सनेह बस उठि नरनाहाँ। बैठारे रघुपति गहि बाहाँ।।
सुनहु तात तुम्ह कहुँ मुनि कहहीं। रामु चराचर नायक अहहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.77 · पुस्तक पृ. 407, 407
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह सुनकर स्नेहवश राजाने उठकर श्रीरघुनाथजीकी बाँह पकड़कर उन्हें बैठा लिया और कहा— हे तात! सुनो, तुम्हारे लिये मुनिलोग कहते हैं कि श्रीराम चराचरके स्वामी हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 407 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि सनेह बस उठि नरनाहाँ। बैठारे रघुपति गहि बाहाँ।।
English explanation
Hearing this, the king rose, overcome with affection, and seated Rama, taking him by the arms.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सनेह | स्नेह के | of affection |
| बस | वश में | under the sway |
| उठि | उठकर | having risen |
| नरनाहाँ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| बैठारे | बैठाया | seated |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम को | Rama, lord of Raghu's lineage |
| गहि | पकड़कर | taking hold of |
| बाहाँ | बाँहें | arms |
2 सुनहु तात तुम्ह कहुँ मुनि कहहीं। रामु चराचर नायक अहहीं।।
English explanation
Listen, dear son: the sages say of you that Rama is the lord of all that moves and does not move.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनो | listen |
| तात | हे प्रिय पुत्र | dear son |
| तुम्ह | तुम्हारे | you |
| कहुँ | विषय में | concerning |
| मुनि | मुनि | sages |
| कहहीं | कहते हैं | say |
| रामु | राम | Rama |
| चराचर | समस्त चल और अचल जगत के | of all moving and nonmoving existence |
| नायक | स्वामी | lord |
| अहहीं | हैं | is |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.77
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 407
- सहायक विषय
- श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका महाराज दशरथके पास विदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 407, 407
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