अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सकुचाइ नाइ महि माथा। बोले चर बर जोरें हाथा।।
मूल पाठ
सुनि सकुचाइ नाइ महि माथा। बोले चर बर जोरें हाथा।।
बूझब राउर सादर साईं। कुसल हेतु सो भयउ गोसाईं।।
स्रोत अभिलेख 2.27 · पुस्तक पृ. 568, 569
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह (मुनिका कुशलप्रश्र) सुनकर सकुचाकर पृथ्वीपर मस्तक नवाकर वे श्रेष्ठ दूत हाथ जोड़कर बोले—हे स्वामी! आपका आदरके साथ पूछना, यही हे गोसाईं! कुशलका कारण हो गया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 569 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि सकुचाइ नाइ महि माथा। बोले चर बर जोरें हाथा।।
English explanation
Hearing this, the worthy messengers felt hesitant; bowing their heads to the ground, they spoke with folded hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | hearing this |
| सकुचाइ | संकोच करके | feeling hesitant |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| महि | धरती पर | to the ground |
| माथा | माथा | their heads |
| बोले | बोले | spoke |
| चर | दूत | messengers |
| बर | श्रेष्ठ | worthy |
| जोरें | जोड़े हुए | folded |
| हाथा | हाथों से | with hands |
2 बूझब राउर सादर साईं। कुसल हेतु सो भयउ गोसाईं।।
English explanation
‘Master, your respectful inquiry itself has become a cause of well-being, revered lord.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बूझब | पूछना | asking |
| राउर | आपका | your |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| साईं | हे स्वामी | O master |
| कुसल | कुशलता का | of well-being |
| हेतु | कारण | cause |
| सो | वह पूछना | that inquiry |
| भयउ | हुआ | has become |
| गोसाईं | हे पूज्य स्वामी | O revered lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 569
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 568, 569
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।