अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि रघुनाथ सचिव संबादू। भयउ सपरिजन बिकल निषादू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरघुनाथजी और सुमन्त्रका यह संवाद सुनकर निषादराज कुटुम्बियोंसहित व्याकुल हो गया। फिर लक्ष्मणजीने कुछ कड़वी बात कही। प्रभु श्रीरामचन्द्रजीने उसे बहुत ही अनुचित जानकर उनको मना किया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 423 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि रघुनाथ सचिव संबादू। भयउ सपरिजन बिकल निषादू।।
पुनि कछु लखन कही कटु बानी। प्रभु बरजे बड़ अनुचित जानी।।
स्रोत अभिलेख 2.96 · पुस्तक पृ. 422, 423
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि रघुनाथ सचिव संबादू। भयउ सपरिजन बिकल निषादू।।
English explanation
Hearing the conversation between Rama and the minister Sumantra, the Nishada chief became distressed along with his family.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| सचिव | मंत्री सुमंत्र | the minister Sumantra |
| संबादू | संवाद | conversation |
| भयउ | हो गए | became |
| सपरिजन | अपने परिजनों सहित | together with his family |
| बिकल | व्याकुल | distressed |
| निषादू | निषादराज गुह | Guha, the Nishada chief |
2 पुनि कछु लखन कही कटु बानी। प्रभु बरजे बड़ अनुचित जानी।।
English explanation
Then Lakshmana spoke some harsh words. Lord Rama judged them highly improper and stopped him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| कछु | कुछ | some |
| लखन | लक्ष्मण ने | Lakshmana |
| कही | कही | spoke |
| कटु | कठोर | harsh |
| बानी | वाणी; बातें | words |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| बरजे | रोक दिया | restrained him |
| बड़ | बहुत | very |
| अनुचित | अनुचित | improper |
| जानी | समझकर | having judged |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.96
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 423
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 422, 423
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।