अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सकुचि राम निज सपथ देवाई। लखन सँदेसु कहिअ जनि जाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीने सकुचाकर, अपनी सौगंध दिलाकर सुमन्त्रजीसे कहा कि आप जाकर लक्ष्मणका यह सन्देश न कहियेगा। सुमन्त्रने फिर राजाका सन्देश कहा कि सीता वनके क्लेश न सह सकेंगी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 423 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सकुचि राम निज सपथ देवाई। लखन सँदेसु कहिअ जनि जाई।।
कह सुमंत्रु पुनि भूप सँदेसू। सहि न सकिहि सिय बिपिन कलेसू।।
स्रोत अभिलेख 2.96 · पुस्तक पृ. 422, 423
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सकुचि राम निज सपथ देवाई। लखन सँदेसु कहिअ जनि जाई।।
English explanation
Feeling embarrassed, Rama bound Sumantra by an oath in his own name not to convey Lakshmana’s message on returning.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकुचि | संकोच करके | feeling embarrassed |
| राम | राम ने | Rama |
| निज | अपनी | his own |
| सपथ | सौगंध | oath |
| देवाई | दिलाई | made him swear |
| लखन | लक्ष्मण का | Lakshmana’s |
| सँदेसु | संदेश | message |
| कहिअ | कहिए; सुनाइए | convey |
| जनि | मत | do not |
| जाई | जाकर | on going back |
2 कह सुमंत्रु पुनि भूप सँदेसू। सहि न सकिहि सिय बिपिन कलेसू।।
English explanation
Sumantra then conveyed the king’s message: Sita will not be able to endure the hardships of the forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा; कहते हैं | said; says |
| सुमंत्रु | मंत्री सुमंत्र ने | Sumantra, the minister |
| पुनि | फिर | then |
| भूप | राजा दशरथ का | King Dasharatha’s |
| सँदेसू | संदेश | message |
| सहि | सह | endure |
| न | नहीं | not |
| सकिहि | सकेंगी | will be able to |
| सिय | सीता | Sita |
| बिपिन | वन का | of the forest |
| कलेसू | कष्ट | hardship |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.96
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 423
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 422, 423
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।