अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि मुनि बचन रामु सकुचाने। भाव भगति आनंद अघाने।।
मूल पाठ
सुनि मुनि बचन रामु सकुचाने। भाव भगति आनंद अघाने।।
तब रघुबर मुनि सुजसु सुहावा। कोटि भाँति कहि सबहि सुनावा।।
स्रोत अभिलेख 2.108 · पुस्तक पृ. 433, 433
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुनिके वचन सुनकर, उनकी भाव-भक्तिके कारण आनन्दसे तृप्त हुए भगवान् श्रीरामचन्द्रजी [लीलाकी दृष्टिसे] सकुचा गये। तब [अपने ऐश्वर्यको छिपाते हुए] श्रीरामचन्द्रजीने भरद्वाज मुनिका सुन्दर सुयश करोड़ों (अनेकों) प्रकारसे कहकर सबको सुनाया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 433 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि मुनि बचन रामु सकुचाने। भाव भगति आनंद अघाने।।
English explanation
Hearing the sage’s words, Rama felt bashful and was filled to satisfaction by the sage’s loving devotion and joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मुनि | मुनि भरद्वाज के | of the sage Bharadvaja |
| बचन | वचन | words |
| रामु | राम | Rama |
| सकुचाने | संकोच करने लगे | felt bashful |
| भाव | प्रेमभाव | loving feeling |
| भगति | भक्ति | devotion |
| आनंद | आनंद से | with joy |
| अघाने | तृप्त हो गए | were fully satisfied |
2 तब रघुबर मुनि सुजसु सुहावा। कोटि भाँति कहि सबहि सुनावा।।
English explanation
Then Rama, the foremost of Raghu’s lineage, recounted the sage’s lovely renown to everyone in countless ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| रघुबर | रघुकुल में श्रेष्ठ राम ने | Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| मुनि | मुनि की | the sage’s |
| सुजसु | उत्तम कीर्ति | excellent renown |
| सुहावा | सुंदर, मनोहर | lovely, pleasing |
| कोटि | करोड़ों, असंख्य | millions of; countless |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| कहि | कहकर | having described |
| सबहि | सबको | to everyone |
| सुनावा | सुनाया | recounted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.108
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 433
- सहायक विषय
- प्रयाग पहुँचना, श्रीराम-भरद्वाज-संवाद, यमुनातीरनिवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 433, 433
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।