अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि मुनि बचन भरत हिंय सोचू। भयउ कुअवसर कठिन सँकोचू।।
मूल पाठ
सुनि मुनि बचन भरत हिंय सोचू। भयउ कुअवसर कठिन सँकोचू।।
जानि गरुइ गुर गिरा बहोरी। चरन बंदि बोले कर जोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.213 · पुस्तक पृ. 520, 521
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुनिके वचन सुनकर भरतके हृदयमें सोच हुआ कि यह बेमौके बड़ा बेढब संकोच आ पड़ा! फिर गुरुजनोंकी वाणीको महत्त्वपूर्ण (आदरणीय) समझकर, चरणोंकी वन्दना करके हाथ जोड़कर बोले—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 520 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि मुनि बचन भरत हिंय सोचू। भयउ कुअवसर कठिन सँकोचू।।
English explanation
Hearing the sage’s words, Bharata grew troubled at heart; in this difficult situation he felt deep hesitation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मुनि | मुनि भरद्वाज के | of the sage Bharadvaja |
| बचन | वचन | words |
| भरत | भरत के | Bharata’s |
| हिंय | हृदय में | in the heart |
| सोचू | चिंता | anxiety |
| भयउ | हुआ | arose |
| कुअवसर | विकट परिस्थिति में | in an unfavourable situation |
| कठिन | गहरा | deep |
| सँकोचू | संकोच | hesitation |
2 जानि गरुइ गुर गिरा बहोरी। चरन बंदि बोले कर जोरी।।
English explanation
Then, recognizing the weight of the guru’s words, Bharata bowed at his feet and spoke with folded hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानि | समझकर | recognizing |
| गरुइ | गंभीर और महत्त्वपूर्ण | weighty and significant |
| गुर | गुरु की | of the guru |
| गिरा | वाणी | speech |
| बहोरी | फिर | then |
| चरन | चरणों में | at his feet |
| बंदि | प्रणाम करके | having bowed |
| बोले | बोले | spoke |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | having joined |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.213
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 520
- सहायक विषय
- भरद्वाजद्वारा भरतका सत्कार
- मुद्रित पृष्ठ
- 520, 521
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।