अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि मुनि बचन प्रेम रस साने। सकुचि राम मन महुँ मुसुकाने।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमुनिके प्रेमरससे सने हुए वचन सुनकर श्रीरामचन्द्रजी [रहस्य खुल जानेके डरसे] सकुचाकर मनमें मुसकराये। वाल्मीकिजी हँसकर फिर अमृत-रसमें डुबोयी हुई मीठी वाणी बोले—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 450 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि मुनि बचन प्रेम रस साने। सकुचि राम मन महुँ मुसुकाने।।
बालमीकि हँसि कहहिं बहोरी। बानी मधुर अमिअ रस बोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.128 · पुस्तक पृ. 450, 451
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनि मुनि बचन प्रेम रस साने। सकुचि राम मन महुँ मुसुकाने।।
English explanation
AI draft: Hearing the sage’s words steeped in love, Rama smiled inwardly with modest reserve.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मुनि | मुनि वाल्मीकि के | of the sage Valmiki |
| बचन | वचन | words |
| प्रेम | प्रेम का | of love |
| रस | रस | essence |
| साने | सने हुए | steeped in |
| सकुचि | संकोच करके | with modest reserve |
| राम | श्रीराम | Rama |
| मन | मन | the mind |
| महुँ | में | within |
| मुसुकाने | मुस्कुराए | smiled |
2 बालमीकि हँसि कहहिं बहोरी। बानी मधुर अमिअ रस बोरी।।
English explanation
Valmiki smiles and speaks again in sweet words steeped in nectar.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बालमीकि | ऋषि वाल्मीकि | the sage Valmiki |
| हँसि | हँसकर | smiling |
| कहहिं | कहते हैं | says |
| बहोरी | फिर | again |
| बानी | वाणी | speech |
| मधुर | मीठी | sweet |
| अमिअ | अमृत का | of nectar |
| रस | रस | essence |
| बोरी | डुबोई हुई | steeped in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.128
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 450
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 450, 451
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।