अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनहु राम अब कहउँ निकेता। जहाँ बसहु सिय लखन समेता।।
मूल पाठ
सुनहु राम अब कहउँ निकेता। जहाँ बसहु सिय लखन समेता।।
जिन्ह के श्रवन समुद्र समाना। कथा तुम्हारि सुभग सरि नाना।।
स्रोत अभिलेख 2.128 · पुस्तक पृ. 450, 451
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे रामजी! सुनिये, अब मैं वे स्थान बताता हूँ जहाँ आप सीताजी और लक्ष्मणजी-समेत निवास करिये। जिनके कान समुद्रकी भाँति आपकी सुन्दर कथारूपी अनेकों सुन्दर नदियोंसे—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 450 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनहु राम अब कहउँ निकेता। जहाँ बसहु सिय लखन समेता।।
English explanation
Listen, Rama; I shall now describe the dwelling places where you may live with Sita and Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनिए | listen |
| राम | हे राम | O Rama |
| अब | अब | now |
| कहउँ | मैं कहूँ | I shall tell |
| निकेता | निवासस्थान | dwelling places |
| जहाँ | जहाँ | where |
| बसहु | आप निवास करें | may you dwell |
| सिय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| समेता | सहित | together with |
2 जिन्ह के श्रवन समुद्र समाना। कथा तुम्हारि सुभग सरि नाना।।
English explanation
Those whose ears are like oceans, into which your stories flow like many beautiful rivers—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिन्ह | जिन लोगों | those people whose |
| के | के | of |
| श्रवन | कान | ears |
| समुद्र | समुद्र के | the ocean |
| समाना | समान | like |
| कथा | कथाएँ | stories |
| तुम्हारि | आपकी | your |
| सुभग | सुंदर | beautiful |
| सरि | नदियाँ | rivers |
| नाना | अनेक | many |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.128
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 450
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 450, 451
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