अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनहु भरत रघुबर मन माहीं। पेम पात्रु तुम्ह सम कोउ नाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे भरत! सुनो, श्रीरामचन्द्रजीके मनमें तुम्हारे समान प्रेमपात्र दूसरा कोई नहीं है। लक्ष्मणजी, श्रीरामजी और सीताजी तीनोंको सारी रात उस दिन अत्यन्त प्रेमके साथ तुम्हारी सराहना करते ही बीती॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 516 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनहु भरत रघुबर मन माहीं। पेम पात्रु तुम्ह सम कोउ नाहीं।।
लखन राम सीतहि अति प्रीती। निसि सब तुम्हहि सराहत बीती।।
स्रोत अभिलेख 2.208 · पुस्तक पृ. 516, 516
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनहु भरत रघुबर मन माहीं। पेम पात्रु तुम्ह सम कोउ नाहीं।।
English explanation
Listen, Bharata: in Rama’s heart, no one is as dear as you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनो | listen |
| भरत | हे भरत | O Bharata |
| रघुबर | रघुकुल-श्रेष्ठ राम के | of Rama, foremost of Raghu’s line |
| मन | मन | heart |
| माहीं | में | in |
| पेम | प्रेम का | of love |
| पात्रु | पात्र | recipient |
| तुम्ह | तुम्हारे | you |
| सम | समान | equal to |
| कोउ | कोई | anyone |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
2 लखन राम सीतहि अति प्रीती। निसि सब तुम्हहि सराहत बीती।।
English explanation
Lakshmana, Rama, and Sita love you greatly; the entire night passed in praising you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| राम | राम | Rama |
| सीतहि | सीता को | to Sita |
| अति | बहुत | great |
| प्रीती | प्रेम है | love |
| निसि | रात | night |
| सब | पूरी | entire |
| तुम्हहि | तुम्हारी ही | you indeed |
| सराहत | प्रशंसा करते | in praising |
| बीती | बीत गई | passed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.208
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 516
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 516, 516
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