अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुख पायउ बिरंचि रचि तेही। ए जेहि के सब भाँति सनेही।।
मूल पाठ
सुख पायउ बिरंचि रचि तेही। ए जेहि के सब भाँति सनेही।।
राम लखन पथि कथा सुहाई। रही सकल मग कानन छाई।।
स्रोत अभिलेख 2.122 · पुस्तक पृ. 445, 445
भावार्थ
मूल पाठ के बादब्रह्माने उसीको रचकर सुख पाया है जिसके ये (श्रीरामचन्द्रजी) सब प्रकारसे स्नेही हैं। पथिकरूप श्रीराम-लक्ष्मणकी सुन्दर कथा सारे रास्ते और जंगलमें छा गयी है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 445 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुख पायउ बिरंचि रचि तेही। ए जेहि के सब भाँति सनेही।।
English explanation
Brahma must have found joy in creating the person to whom these travelers are devoted in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुख | सुख | joy |
| पायउ | पाया | found |
| बिरंचि | ब्रह्मा, सृष्टि के रचयिता | Brahma, the creator |
| रचि | रचकर | having created |
| तेही | उसी व्यक्ति को | that person |
| ए | ये | these travelers |
| जेहि | जिस व्यक्ति | whom |
| के | के | of; toward |
| सब | सभी | every |
| भाँति | प्रकार से | way |
| सनेही | स्नेह रखने वाले | affectionately devoted |
2 राम लखन पथि कथा सुहाई। रही सकल मग कानन छाई।।
English explanation
The delightful account of Rama and Lakshmana’s journey spread throughout the roads and forests.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम | Rama |
| लखन | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| पथि | मार्ग-यात्रा की | of the journey |
| कथा | कथा, चर्चा | account, talk |
| सुहाई | सुहावनी | delightful |
| रही | रही; फैलकर व्याप्त हुई | remained; came to pervade |
| सकल | सभी | all |
| मग | मार्ग | roads |
| कानन | वन | forests |
| छाई | छाई हुई, फैली हुई | spread, pervading |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.122
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 445
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 445, 445
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।