अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सील सकुच सुठि सरल सुभाऊ। कृपा सनेह सदन रघुराऊ।।
मूल पाठ
सील सकुच सुठि सरल सुभाऊ। कृपा सनेह सदन रघुराऊ।।
अरिहुक अनभल कीन्ह न रामा। मैं सिसु सेवक जद्यपि बामा।।
स्रोत अभिलेख 2.183 · पुस्तक पृ. 495, 495
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरघुनाथजी शील, संकोच, अत्यन्त सरल स्वभाव, कृपा और स्नेहके घर हैं। श्रीरामजीने कभी शत्रुका भी अनिष्ट नहीं किया। मैं यद्यपि टेढ़ा हूँ पर हूँ तो उनका बच्चा और गुलाम ही॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 495 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सील सकुच सुठि सरल सुभाऊ। कृपा सनेह सदन रघुराऊ।।
English explanation
Rama, king of Raghu’s lineage, is gracious and considerate, utterly straightforward in nature, and an abode of compassion and affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सील | सौम्य सदाचार | gracious conduct |
| सकुच | संकोच और दूसरों का लिहाज | modesty and consideration |
| सुठि | बहुत | very |
| सरल | सरल, निष्कपट | straightforward, guileless |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
| कृपा | करुणा | compassion |
| सनेह | स्नेह | affection |
| सदन | घर; आश्रय | abode |
| रघुराऊ | रघुकुल के राजा राम | Rama, king of Raghu’s lineage |
2 अरिहुक अनभल कीन्ह न रामा। मैं सिसु सेवक जद्यपि बामा।।
English explanation
Rama has not done harm even to an enemy; I am his child and servant, though wayward.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अरिहुक | शत्रु का भी | even to an enemy |
| अनभल | अनिष्ट | harm |
| कीन्ह | किया | did |
| न | नहीं | not |
| रामा | राम ने | Rama |
| मैं | मैं | I |
| सिसु | बालक | child |
| सेवक | सेवक | servant |
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| बामा | प्रतिकूल आचरण वाला | wayward; contrary in conduct |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.183
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 495
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 495, 495
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।