अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीय लखन जेहि बिधि सुखु लहहीं। सोइ रघुनाथ करहि सोइ कहहीं।।
मूल पाठ
सीय लखन जेहि बिधि सुखु लहहीं। सोइ रघुनाथ करहि सोइ कहहीं।।
कहहिं पुरातन कथा कहानी। सुनहिं लखनु सिय अति सुखु मानी।
स्रोत अभिलेख 2.141 · पुस्तक पृ. 460, 461
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजी और लक्ष्मणजीको जिस प्रकार सुख मिले, श्रीरघुनाथजी वही करते और वही कहते हैं। भगवान् प्राचीन कथाएँ और कहानियाँ कहते हैं और लक्ष्मणजी तथा सीताजी अत्यन्त सुख मानकर सुनते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 460 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सीय लखन जेहि बिधि सुखु लहहीं। सोइ रघुनाथ करहि सोइ कहहीं।।
English explanation
Rama does and says whatever brings comfort to Sita and Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| लखन | लक्ष्मण, राम के भाई | Lakshmana, Rama’s brother |
| जेहि | जिस | by whichever |
| बिधि | प्रकार से | means |
| सुखु | सुख | comfort |
| लहहीं | पाते हैं | obtain |
| सोइ | वही | that very thing |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| करहि | करते हैं | does |
| सोइ | वही | that very thing |
| कहहीं | कहते हैं | says |
2 कहहिं पुरातन कथा कहानी। सुनहिं लखनु सिय अति सुखु मानी।
English explanation
Rama tells ancient tales and stories; Lakshmana and Sita listen with great delight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहिं | कहते हैं | tells |
| पुरातन | पुरानी | ancient |
| कथा | कथाएँ | tales |
| कहानी | कहानियाँ | stories |
| सुनहिं | सुनते हैं | listen |
| लखनु | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| सिय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| अति | बहुत | great |
| सुखु | सुख | delight |
| मानी | अनुभव करके | experiencing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.141
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 460
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 460, 461
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