अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीय आइ मुनिबर पग लागी। उचित असीस लही मन मागी।।
मूल पाठ
सीय आइ मुनिबर पग लागी। उचित असीस लही मन मागी।।
गुरपतिनिहि मुनितियन्ह समेता। मिली पेमु कहि जाइ न जेता।।
स्रोत अभिलेख 2.246 · पुस्तक पृ. 548, 549
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजी आकर मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठजीके चरणों लगीं और उन्होंने मनमाँगी उचित आशिष पायी। फिर मुनियोंकी ियोंसहित गुरुपत्नी अरुन्धतीजीसे मिलीं। उनका जितना प्रेम था, वह कहा नहीं जाता॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 548 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सीय आइ मुनिबर पग लागी। उचित असीस लही मन मागी।।
English explanation
Sita came and bowed at the eminent sage’s feet, receiving the fitting blessing she desired.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| आइ | आकर | having come |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि के | of the eminent sage |
| पग | चरणों में | at the feet |
| लागी | प्रणाम करने लगीं | bowed |
| उचित | उपयुक्त | fitting |
| असीस | आशीर्वाद | blessing |
| लही | प्राप्त किया | received |
| मन | मन में | in her heart |
| मागी | माँगा हुआ | desired |
2 गुरपतिनिहि मुनितियन्ह समेता। मिली पेमु कहि जाइ न जेता।।
English explanation
Sita met the guru’s wife together with the sages’ wives; the love of that meeting was beyond description.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुरपतिनिहि | गुरु की पत्नी से | with the guru’s wife |
| मुनितियन्ह | मुनियों की पत्नियों के | with the sages’ wives |
| समेता | सहित | together with |
| मिली | मिलीं | met |
| पेमु | प्रेम | love |
| कहि | कहा | described |
| जाइ | जा सकता | can be |
| न | नहीं | not |
| जेता | जितना था | as great as it was |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.246
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 548
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 548, 549
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