अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बंदि बंदि पग सिय सबही के। आसिरबचन लहे प्रिय जी के।।
मूल पाठ
बंदि बंदि पग सिय सबही के। आसिरबचन लहे प्रिय जी के।।
सासु सकल जब सीयँ निहारीं। मूदे नयन सहमि सुकुमारीं।।
स्रोत अभिलेख 2.246 · पुस्तक पृ. 548, 549
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजीने सभीके चरणोंकी अलग-अलग वन्दना करके अपने हृदयको प्रिय (अनुकूल) लगनेवाले आशीर्वाद पाये। जब सुकुमारी सीताजीने सब सासुओंको देखा, तब उन्होंने सहमकर अपनी आँखें बंद कर लीं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 548 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बंदि बंदि पग सिय सबही के। आसिरबचन लहे प्रिय जी के।।
English explanation
Bowing repeatedly at everyone’s feet, Sita received blessings dear to her heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बंदि | प्रणाम करके | bowing |
| बंदि | बार-बार प्रणाम करके | bowing again and again |
| पग | चरणों में | at the feet |
| सिय | सीता ने | Sita |
| सबही | सभी | everyone |
| के | के | of |
| आसिरबचन | आशीर्वाद के वचन | words of blessing |
| लहे | प्राप्त किए | received |
| प्रिय | प्रिय लगने वाले | dear |
| जी | हृदय | the heart |
| के | को | to |
2 सासु सकल जब सीयँ निहारीं। मूदे नयन सहमि सुकुमारीं।।
English explanation
When Sita saw all her mothers-in-law, the delicate princess closed her eyes in dismay.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सासु | सासों को | her mothers-in-law |
| सकल | सभी | all |
| जब | जब | when |
| सीयँ | सीता ने | Sita |
| निहारीं | देखा | saw |
| मूदे | बंद कर लिए | closed |
| नयन | नेत्र | eyes |
| सहमि | सहमकर | in dismay |
| सुकुमारीं | सुकुमार सीता | delicate Sita |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.246
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 548
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 548, 549
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