अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परीं बधिक बस मनहुँ मरालीं। काह कीन्ह करतार कुचालीं।।
मूल पाठ
परीं बधिक बस मनहुँ मरालीं। काह कीन्ह करतार कुचालीं।।
तिन्ह सिय निरखि निपट दुखु पावा। सो सबु सहिअ जो दैउ सहावा।।
स्रोत अभिलेख 2.246 · पुस्तक पृ. 548, 549
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[सासुओंकी बुरी दशा देखकर] उन्हें ऐसा प्रतीत हुआ मानो राजहंसिनियाँ बधिकके वशमें पड़ गयी हों। [मनमें सोचने लगीं कि] कुचाली विधाताने क्या कर डाला? उन्होंने भी सीताजीको देखकर बड़ा दु:ख पाया। [सोचा] जो कुछ दैव सहावे, वह सब सहना ही पड़ता है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 548 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 परीं बधिक बस मनहुँ मरालीं। काह कीन्ह करतार कुचालीं।।
English explanation
She was like a female swan caught in a hunter’s power. What a cruel turn the Creator had brought about!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परीं | पड़ी हुई थीं | had fallen |
| बधिक | शिकारी के | of a hunter |
| बस | वश में | in the power |
| मनहुँ | मानो | as though |
| मरालीं | हंसिनी | a female swan |
| काह | कैसी | what a |
| कीन्ह | की | brought about |
| करतार | विधाता ने | the Creator |
| कुचालीं | बुरी चाल | cruel turn |
2 तिन्ह सिय निरखि निपट दुखु पावा। सो सबु सहिअ जो दैउ सहावा।।
English explanation
Seeing Sita, those mothers-in-law felt profound sorrow. Whatever fate makes one endure must all be borne.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्ह | उन सासों ने | those mothers-in-law |
| सिय | सीता को | Sita |
| निरखि | देखकर | on seeing |
| निपट | अत्यंत | profound |
| दुखु | दुःख | sorrow |
| पावा | अनुभव किया | felt |
| सो | वह | that |
| सबु | सब | all |
| सहिअ | सहना पड़ता है | must be endured |
| जो | जो | whatever |
| दैउ | भाग्य | fate |
| सहावा | सहने को विवश करता है | makes one endure |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.246
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 548
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 548, 549
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।