अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीता राम संग बनबासू। कोटि अमरपुर सरिस सुपासू।।
मूल पाठ
सीता राम संग बनबासू। कोटि अमरपुर सरिस सुपासू।।
परिहरि लखन रामु बैदेही। जेहि घरु भाव बाम बिधि तेही।।
स्रोत अभिलेख 2.28 · पुस्तक पृ. 577, 578
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीसीतारामजीके साथ वनमें रहना करोड़ों देवलोकोंके [निवासके] समान सुखदायक है। श्रीलक्ष्मणजी, श्रीरामजी और श्रीजानकीजीको छोड़कर जिसको घर अच्छा लगे, विधाता उसके विपरीत हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 577 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सीता राम संग बनबासू। कोटि अमरपुर सरिस सुपासू।।
English explanation
Living in the forest with Sita and Rama is a delightful abode equal to millions of heavens.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीता | सीता | Sita |
| राम | राम | Rama |
| संग | के साथ | with |
| बनबासू | वन में निवास | forest dwelling |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| अमरपुर | देवताओं की नगरी; स्वर्ग | the city of the gods; heaven |
| सरिस | के समान | equal to |
| सुपासू | सुखद निवास | comfortable abode |
2 परिहरि लखन रामु बैदेही। जेहि घरु भाव बाम बिधि तेही।।
English explanation
For anyone who prefers home after leaving Lakshmana, Rama, and Sita, fate is unfavorable.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परिहरि | छोड़कर | leaving behind |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| रामु | राम | Rama |
| बैदेही | सीता, विदेह की राजकुमारी | Sita, princess of Videha |
| जेहि | जिसे | to whom |
| घरु | घर | home |
| भाव | अच्छा लगता है | is pleasing |
| बाम | प्रतिकूल | unfavorable |
| बिधि | विधाता | the disposer of fate |
| तेही | उसके प्रति | toward that person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 577
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 577, 578
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।