अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि बासर बीते चारी। रामु निरखि नर नारि सुखारी।।
मूल पाठ
एहि बिधि बासर बीते चारी। रामु निरखि नर नारि सुखारी।।
दुहु समाज असि रुचि मन माहीं। बिनु सिय राम फिरब भल नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.28 · पुस्तक पृ. 577, 578
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकार चार दिन बीत गये। श्रीरामचन्द्रजीको देखकर सभी नर-नारी सुखी हैं। दोनों समाजोंके मनमें ऐसी इच्छा है कि श्रीसीतारामजीके बिना लौटना अच्छा नहीं है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 577 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 एहि बिधि बासर बीते चारी। रामु निरखि नर नारि सुखारी।।
English explanation
AI draft: Four days passed in this way. The men and women were happy to behold Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | way |
| बासर | दिन | days |
| बीते | बीत गए | passed |
| चारी | चार | four |
| रामु | श्रीराम को | Rama |
| निरखि | देखकर | on beholding |
| नर | पुरुष | men |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| सुखारी | सुखी | happy |
2 दुहु समाज असि रुचि मन माहीं। बिनु सिय राम फिरब भल नाहीं।।
English explanation
Both gatherings felt that returning without Sita and Rama would not be good.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दुहु | दोनों | both |
| समाज | समाजों के | gatherings |
| असि | ऐसी | such |
| रुचि | इच्छा | desire |
| मन | मन | minds |
| माहीं | में | within |
| बिनु | बिना | without |
| सिय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| राम | राम | Rama |
| फिरब | लौटना | returning |
| भल | अच्छा | good |
| नाहीं | नहीं है | is not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 577
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 577, 578
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।