अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीतापति सेवक सेवकाई। कामधेनु सय सरिस सुहाई।।
मूल पाठ
सीतापति सेवक सेवकाई। कामधेनु सय सरिस सुहाई।।
भरत भगति तुम्हरें मन आई। तजहु सोचु बिधि बात बनाई।।
स्रोत अभिलेख 2.266 · पुस्तक पृ. 565, 566
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीतानाथ श्रीरामजीके सेवककी सेवा सैकड़ों कामधेनुओंके समान सुन्दर है। तुम्हारे मनमें भरतजीकी भक्ति आयी है, तो अब सोच छोड़ दो। विधाताने बात बना दी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 565 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सीतापति सेवक सेवकाई। कामधेनु सय सरिस सुहाई।।
English explanation
AI draft: Service to a servant of Rama, Sita’s husband, is as beneficial and delightful as a hundred wish-fulfilling cows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीतापति | सीता के पति राम के | of Rama, Sita’s husband |
| सेवक | सेवक की | of the servant |
| सेवकाई | सेवा | service |
| कामधेनु | मनोकामना पूरी करने वाली दिव्य गाय | the divine wish-fulfilling cow |
| सय | सौ | a hundred |
| सरिस | के समान | like |
| सुहाई | सुखद और हितकारी | delightful and beneficial |
2 भरत भगति तुम्हरें मन आई। तजहु सोचु बिधि बात बनाई।।
English explanation
The thought of Bharata’s devotion has entered your mind; abandon worry, for Providence has set matters right.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | राम के भाई भरत की | of Bharata, Rama’s brother |
| भगति | भक्ति | devotion |
| तुम्हरें | तुम्हारे | your |
| मन | मन में | in the mind |
| आई | आई है | has arisen |
| तजहु | त्याग दो | give up |
| सोचु | चिंता | worry |
| बिधि | विधाता ने | Providence |
| बात | बात; परिस्थिति | the matter; circumstances |
| बनाई | अनुकूल कर दी | has set right |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.266
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 565
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 565, 566
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।